तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार यहाँ 8 बीघा का एक सरकारी तालाब है। इस ज़मीन पर लगभग 12-13 साल पहले एक बड़ी मस्जिद बनाई गई थी। हालाँकि जब लेखपाल जाँच के लिए पहुँचा तो किसी ने भी मस्जिद के निर्माण की ज़िम्मेदारी या ट्रस्टी होने का दावा नहीं किया। इसके चलते मस्जिद पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि यदि मस्जिद कानूनी और स्वीकृत दस्तावेज़ प्रस्तुत करने में विफल रहती है तो तालाब की भूमि पर कोई भी संरचना चाहे वह मस्जिद हो या अन्य कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ध्वस्त कर दी जाएगी।
संभल प्रशासन का दावा है कि यह भूमि पहले तालाब के नाम पर दर्ज थी। लेकिन भू-माफियाओं ने अवैध रूप से प्लॉटिंग करके निर्दोष लोगों को बेच दी। इसमें बिचौलियों और माफिया की मिलीभगत शामिल थी। कई परिवारों ने भरोसा करके पैसे दे दिए। तहसीलदार ने कहा कि अवैध कब्जाधारियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और जिन लोगों को जमीन बेची गई थी, उनका भी सत्यापन किया जाएगा। प्रशासन ने लेखपाल टीम को जाँच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार ने जनता से अपील की है कि इस तरह की भूमि खरीद-फरोख्त में शामिल कोई भी व्यक्ति अपने दस्तावेज़ और शिकायत तुरंत तहसील में जमा करा दे। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने दोहराया कि नियमों के विरुद्ध अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे।
प्रशासन के अनुसार, सरकारी तालाब की भूमि पर बने 80 मकानों को 15 दिन का नोटिस जारी किया गया है। कुछ मकान अभी भी खुले नहीं हैं, और इन्हें भी जल्द ही इस दायरे में शामिल कर लिया जाएगा। वहाँ बनी मस्जिद के मुतवल्ली के नाम से नोटिस चस्पा कर दिया गया है। तहसीलदार ने साफ कहा है कि अगर 15 दिन के अंदर जवाब नहीं मिला तो बुलडोजर चलाकर मकान गिराए जाएँगे। चाहे प्रभावित मकान मकान हों या धार्मिक स्थल। उधर तहसील प्रशासन के नोटिस से हड़कंप मच गया है। हातिम सराय इलाका सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद का गढ़ माना जाता है, क्योंकि यह इलाका सपा सांसद और सपा विधायक के आवासों के बीच स्थित है।
जिले में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर प्रशासन सख्त है। सदर तहसील के हातिम सराय इलाके में तालाब की जमीन पर मकान बनाकर बेचने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने खुद मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि तालाब की जमीन पर बने मकानों के मालिकों को अच्छी तरह पता है कि जमीन अवैध तरीके से खरीदी गई है। तहसीलदार ने बताया कि सभी मकान मालिकों को तहसील कार्यालय आकर यह बताने का मौका दिया गया है कि उन्होंने किससे और किस आधार पर ज़मीन खरीदी है। प्रशासन अब हर प्लॉट की अलग-अलग निशानदेही कर रहा है।
उन्होंने बताया कि आज लगभग 30 से 40 मकान चिह्नित किए जाएँगे। इन मकानों को लाल निशानों से चिह्नित कर दिया गया है। बाकी मकानों की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वे मस्जिद गए थे, लेकिन मस्जिद प्रबंधक और मुतवल्ली नहीं आए। इसके बावजूद, प्रशासन ने वहाँ भी ज़मीन चिह्नित कर ली है। आसपास के निवासियों को चेतावनी दी गई है कि अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस जारी किया गया है।

